● सुंदर और घने बाल कौन नहीं चाहता! लेकिन, इन दिनों प्रदूषण और मानसिक परेशानियां बालों को बहुत नुकसान पहुंचा रही हैं। बाल झड़ना और समय से पहले सफेद होना आम समस्या बन गई है। खान-पान की आदतें बदलकर और थोड़ा खुशमिजाज अंदाज का लाइफस्टाइल अपनाकर बालों को स्वस्थ रखा जा सकता है। लेकिन, साथ ही कुछ योगासनों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर बालों की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। ािए जानें, कौन-कौन से योगासन आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं..
1) अनुलोम विलोम प्राणायाम फिर ध्यान :-
अनुलोम-विलोम प्राणायम को नाड़ी-शोधक क्रिया कहा जाता है। इससे तनाव, क्रोध, चिन्ता, चिड़चिड़ापन, भय, घबराहट, अशांति, बेचैनी, हाई ब्लडप्रेशर, माइग्रेन, नींद न आना, कम्पवात आदि मन-मस्तिष्क के विकार दूर होते हैं और बाल भी स्वस्थ रहते हैं।
विधि :- किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाएं। कमर व गर्दन को सीधा कर आंखें बंद कर लें। अब सीधे हाथ की प्राणायाम मुद्रा बना लें और नासारन्ध्रों पर ले जाएं। प्राणायाम मुद्रा के लिए तर्जनी और मध्यमा अंगुलियों को सीधा रखते हुए अंगूठे से दाएं नासारन्ध्र को बंद कर लें। यहां पर तर्जनी और मध्यमा अंगुलियों को माथे के बीचोंबीच आज्ञाचक्र स्थान पर रखें। अब बाएं नासारन्ध्र से धीरे-धीरे सांस को बाहर की ओर निकालें। संपूर्ण सांस निकालने के पश्चात सांस को पुन: बाएं नासारन्ध्र से ही भरना प्रारंभ करें। अधिक से अधिक सांस भरने के बाद बाएं नासारन्ध्र को अनामिका और कनिष्ठा अंगुलियों से बंद कर लें व अंगूठे को दाएं नासारन्ध्र से हटाकर दाईं नासिका से सांस धीरे-धीरे बाहर निकालें। इस प्रक्रिया को 11 बार करें।
2) वज्रासन :-
यह एकमात्र ऐसा आसन है जिसे खाना खाने के बाद किया जाता है। भोजन करने के बाद दस मिनट तक वज्रासन में बैठने से भोजन जल्दी पचने लगता है और कब्ज, गैस, अफारा आदि से छुटकारा मिलता है। यदि घुटनों में दर्द रहता हो, तो वज्रासन नहीं करना चाहिए। पेट और हाजमा सही रहने से बाल भी स्वस्थ बनते हैं।
विधि : - दोनों घुटनों को सामने से मिलाएं और पैर की एड़ियां बाहर की तरफ रखें और पंजे अन्दर की ओर। अपने दोनों हाथों को घुटनों के ऊपर रखें।
3) पवनमुक्तासन :-
इस आसन में दबाव पेट की ओर पड़ने से रक्त का संचार हृदय व फेफड़ों की ओर बढ़ जाता है। इससे हृदय को बल मिलता है और फेफड़ों की सक्रियता बढ़ती है, जिससे अस्थमा, सांस फूलना आदि कफ दोष दूर करने और इन रोगों की रोकथाम में मदद मिलती है और पेट के रोग दूर होते हैं जिससे बाल भी मजबूत होते हैं।
विधि :- इसके लिए कमर के बल ही लेट कर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ लें। अब पैरों को उठाकर घुटनों को छाती की ओर ले आएं व दोनों हाथों से पैरों को कस कर पकड़ लें। अब सांस बाहर निकालें व हाथों से पैरों को पेट की ओर दबाएं। सिर उठाकर ठोड़ी को दोनों घुटनों के बीच में लगा दें। अब सांस की गति को सामान्य रखते हुए आंखें बंद करके आसन को यथाशक्ति रोक कर रखें। इस अभ्यास में कमर के बल आगे-पीछे झूल सकते हैं और बांयी व दायीं ओर लुढ़क सकते हैं।
4) मत्स्यासन :-
मत्यासन पेट के रोगों जैसे कब्ज के लिए उत्तम है। यह आसन थायरायड में भी काफी फायदेमंद होता है। इस आसन को बालों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।
विधि :- दण्डासन की पोजिशन में बैठकर दाएं पैर को बाएं पैर की जंघा पर रखें अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब हाथों का सहारा लेते हुए पीछे की ओर अपनी कुहनियां टिकाकर लेट जाएं। पीठ और छाती ऊपर की ओर उठी हुई तथा घुटने भूमि पर टिकाकर रखें। अब अपने हाथो से पैर के अंगूठे पकड़ें। आपकी कोहनी जमीन से लगी होनी चाहिए।
5) शीर्षासन :-
मत्स्यासन करने के बाद थोड़ा आराम करें और उसके बाद शीर्षासन करें। शीर्षासन तनाव को कम करता है। और, बालों का झड़ना और समय से पहले सफेद होना तनाव के कारण भी होता है। ऐसे में शीर्षासन फायदा पहुंचाता है।
विधि :- समतल स्थान पर वज्रासन की अवस्था में बैठें। अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों की कुहनियों को जमीन पर टिका दें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ लें। अब सिर को दोनों हथेलियों के मध्य धीरे-धीरे रखें। सांस सामान्य रखें। सिर को जमीन पर टिकाने के बाद धीरे-धीरे शरीर का पूरा वजन सिर छोड़ते हुए शरीर को ऊपर की उठाना शुरू करें। शरीर का भार सिर पर लें। शरीर को सीधा कर लें।





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