● अगर आप कमजोरी से परेशान हैं और दुर्बलता दूर नहीं हो रही है, पेट में हमेशा गड़बड़ बनी रहती है तो दवाएं लेने से बेहतर है कि आप रोजाना भृंगासन करें। इस आसन की पूर्ण अवस्था मेंढक के समान हो जाती है इसीलिए इसे भृंगासन कहा जाता है।

● भृंगासन की विधि :-
किसी साफ और समतल स्थान पर कंबल या दरी बिछाकर बैठ जाएं। अब अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर ले जाएं। दाएं एड़ी को दाएं नितम्ब (हिप्प) से सटाकर और बाईं एड़ी को बाएं नितम्ब से सटाकर रखें। दोनों पंजे व एड़ियां आपस में मिलाकर रखें तथा दोनों घुटनों के बीच थोड़ी दूरी रखें। अब गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुके और अपने हाथों को कोहनियों से मोड़कर घुटनों के बीच रखकर कोहनी से हथेलियों तक के भाग को नीचे फर्श पर टिकाकर रखें। दोनों हाथों के बीच थोड़ी दूरी रखें तथा अंगुलियों को आपस में मिलाकर रखें। सिर को उठाकर रखें और नजरें सामने रखें। आसन की इस स्थिति में सांस को रोककर कुछ देर रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठकर सामान्य स्थिति में एड़ियों पर बैठ जाएं। कुछ क्षण रुकें और फिर इस आसन को दोबारा करें। भृंगासन को कम से कम 5 से 10 बार करें।

● भृंगासन के लाभ :-
भृंगासन करने से पाचनशक्ति मजबूत होती है तथा यह भूख को बढ़ाता है। यह आसन पेट के भारीपन को दूर करता है तथा पेट की गैस, कब्ज एवं अन्य सभी विकार को खत्म करता हैं। इस आसन को करने से कन्धों, हाथ व पैर आदि की कमजोरी दूर होती है। साथ ही शरीर स्वस्थ और निरोगी बनता है।


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